सड़क सुरक्षा: मुख्य संदेश
Written by Radio4Child on 2 February 2025
- दुनिया के कुल वाहनों के सिर्फ 1 प्रतिशत व्हीकल ही भारत की सड़कों पर दौड़ते हैं, लेकिन सड़क दुर्घटना में मरने वालों का आंकड़ा हमारे देश का दुनियाभर में 11 प्रतिशत है। जबकि रोड़ एक्सीडेंट में कुल भागीदारी 6 प्रतिशत है। (मार्च, 2018)
- दुनियाभर में रोजाना होने वाली मौतों में 42 बच्चे और 31 युवा होते हैं। रोड एक्सीडेंट में होने वाली मृत्यु दर का आंकड़ा 10 प्रतिशत है। इनमें से ज्यादात्तर हादसे स्कूलों और कॉलेजों के आसपास होते हैं।
- चार मुख्य रिस्क फैक्टरों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कानून बनाने के लिए जोर दिया जा रहा है: इसमें तेज गति से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, मोटरसाइकिल पर हेलमेट का उपयोग और चार पहिया वाहनों सीट–बेल्ट का उपयोग शामिल हैं।
- भारत में बच्चों और युवाओं में रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट्स में होने वाली मृत्यु का मुख्य कारण तेज गति से व्हीकल चलाना है।
- रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट्स (आरटीआई) को कम करने में ये चार कारक मददगार होंगे:
- 30 किमी/घंटा की स्पीड लीमिट वाले जोन तैयार करने से पैदल चलने वाले बच्चों को लगने वाली चोटों में 70% की कमी आई है।
- साइकिलिंग के लिए अलग लेन बनाने से शहरों में साइकिल से होने वाली मौतों में 44% की कमी आई है।
- मोटरसाइकिल चलाते समय हेलमेट का उपयोग करने से सिर की चोटों में 69% की कमी आई है और मौतों की संख्या में 42% की कमी आई है।
- यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार पैदल यात्री सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं, जो सड़क यातायात दुर्घटनाओं में 42% के लिए ज़िम्मेदार हैं, इसके बाद व्हीकल सवार 26% और मोटरसाइकिल सवार 24% हादसों के लिए ज़िम्मेदार हैं। अनुमान के मुताबिक पैदल यात्रियों की प्रभावशीलता बढ़ने से पैदल यात्रियों की चोटों में 25-40% की कमी आएगी।
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